Questions and Answers

These posts are based on conversation with people.

Bhartiye Shashtra

भारतीय शास्त्रों में यदि ज्ञान है, तो नवीन शोध क्यों नहीं होते ?

प्रश्न – यदि वैज्ञानिक सिद्धांत पहले से ही हमारे ग्रंथों में उपस्थित थे तो जनसामान्य तक क्यों नहीं पहुंचे? हम अब ये क्यों कहते फिरते हैं की इस सिद्धांत को इन्होंने दिया, उस सिद्धांत की खोज उन्होंने किया था? ग्रंथों से कुछ नया क्यों नहीं ढूँढते ताकि सभी लोग कह सके की हाँ, ये हिंदू […]

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Graho Ka Parmocchansh

ग्रहों के परमोच्चांश एवं अनुभव कथन

प्रतिदिन के ज्योतिष शास्त्रीय अभ्यास एवं विद्यार्थियों के द्वारा पठन पाठन कार्य से कुछ न कुछ नए अनुभव आते ही रहते हैं। जिनमें से कुछ महत्वपूर्ण अनुभव आपके साथ भी साझा करता हूँ जिससे की आपको भी कुछ प्रेरणा मिले। अभी कुछ समय मुकुल कौशिक नामक विद्यार्थी ने बृहत्पाराशर होराशास्त्र ग्रन्थ के एक श्लोक का

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मुहूर्त साधन

मुहूर्त साधन पर सरलतम विवेचना

आज मुहूर्त साधन विषय पर सुप्रसिद्ध कथाव्यास आचार्य श्री गोपेश भारद्वाज जी के द्वारा एक प्रश्न पूछा गया। प्रश्नकर्ता और मेरे बीच हुए बातचीत के अंश यथावत् प्रस्तुत किए जा रहे हैं। प्रश्नकर्ता – जय श्री राधे भैया ! कथा/पूजन/हवन अथवा किसी अनुष्ठान का स्वयं के लिए अथवा यजमान के लिए कैसे मुहूर्त देखा जाता

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हमारे उत्सव अंग्रेजी दिनांक से क्यों मनाए जाते हैं ?

प्रश्न – आचार्य जी एक प्रश्न है समाधान करें। विश्व कर्मा पूजा १७ तारिक को ही क्यों आते है अन्य उत्सव आदि ऐसे देखा नही जाता। कृपया शंका समाधान करें। उत्तर – कालमान 9 प्रकार के होते हैं। उसमें से सूर्य पर आधारित मान सौरमान कहा जाता है। यह सौरमान लगभग स्थिरगति से चलने वाला

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जिज्ञासु के प्रश्न और ब्रजेश पाठक ज्यौतिषाचार्य जी का उत्तर

प्रश्न – “कालसर्प योग, पितृदोष, गुरुचाण्डाल योग, अंगारक योग, बुधादित्य योग, पिशाच योग, विषयोग आदि सभी कपोल कल्पित और अशास्त्रिय योग है। बस इन कपोल-कल्पित योगों के द्वारा सामान्य जनमानस को दिग्भ्रमित किया जा रहा है।” आचार्य जी उक्त व्यक्तव्य पोस्ट एवं पोस्टर के रूप में वायरल हो रहा है, इसपर आपका क्या विचार है,

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Astadhatu

अष्टधातु की अंगूठी के सत्यता का विवेचन | Details About ashtadhatu Rings

प्रश्न – आपके पास अष्ट धातु की अंगूठी उपलब्ध है क्या ? आपके यूट्यूब पर रत्न वाला एक वीडियो देखा उत्तर – नहीं हमारे पास अवेलेबल नहीं है. शुद्ध अष्टधातु की अंगुठी बनाना बहुत महंगा होता है। मार्केट में उपलब्ध 98% to 99% अष्टधातु के नाम से बिकने वाली अंगूठी फेक है। यहाँ तक की

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क्या शनि विरोधाभासी फल प्रदान करता है ?

जिज्ञासु का प्रश्न – ज्योतिषीय दुविधा एकतरफ ज्योतिषीवर्ग कहता है कि शनि ग्रह मंदता, आलस्य और विलंब के कारक है तो वही दूसरी ओर यही ज्योतिषी वर्ग कहता है कि शनि देव कठोर परिश्रम भी करवाता है अब ये दो विरोधाभासी बाते कैसे संभव है? जिसका गुणधर्म ही विलंब और आलस्य हो वो भला कठोर

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ईश्वर साक्षात्कार के बाद मुक्ति कब ???

ईश्वर साक्षात्कार के बाद मुक्ति कब ???   कुछ समय पहले मेरे एक मित्र ने मुझसे बहुत जबरदस्त प्रश्न पूछा था आज उसका सटीक शास्त्रीय उत्तर आप सबके साथ साझा कर रहा हूँ। #प्रश्न- ईश्वर(परमब्रह्म) सच्चिदानन्द(त्रिकालाबाधित), अखण्ड(सजातीय-विजातीय-स्वगतभेदशून्य), सर्वदा विद्यमान, प्रकाशरुप, चैतन्यस्वरुप, आनन्दघन, सर्वशक्तिमान परमात्मा जो जीवों के लिए एकमात्र लक्ष्य हैं। जिनके दर्शन मात्र से

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ईश्वर साक्षात्कार के बाद मुक्ति कब ???

ईश्वर साक्षात्कार के बाद मुक्ति कब ???   कुछ समय पहले मेरे एक मित्र ने मुझसे बहुत जबरदस्त प्रश्न पूछा था आज उसका सटीक शास्त्रीय उत्तर आप सबके साथ साझा कर रहा हूँ। #प्रश्न- ईश्वर(परमब्रह्म) सच्चिदानन्द(त्रिकालाबाधित), अखण्ड(सजातीय-विजातीय-स्वगतभेदशून्य), सर्वदा विद्यमान, प्रकाशरुप, चैतन्यस्वरुप, आनन्दघन, सर्वशक्तिमान परमात्मा जो जीवों के लिए एकमात्र लक्ष्य हैं। जिनके दर्शन मात्र से

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ग्रहों में परस्पर बलवृद्धि

ग्रहों में परस्पर बलवृद्धि   जिज्ञासु के प्रश्न– जय श्री राम ! कृपा करके कौन सा ग्रह किस ग्रह के साथ कैसा फल प्रदान करता है,तथा उसका फल कब विपरिणाम होता है ,यह भी बताएँ । मेरा उत्तर- यह प्रश्न बहुत महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि कई बार इस विषय पर ज्योतिर्विद भी संशय में पड़ जाते

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