चित्रा नक्षत्र में जन्म का फल….

चित्रा नक्षत्र में जन्म का फल….

चित्रा जन्मनक्षत्र फल Image

आज हमलोग चित्रा जन्मनक्षत्र फल जानेंगे। चित्रा नक्षत्र सर्वाधिक प्रभावशाली नक्षत्रों में से एक है। यह नक्षत्र अवसरों के प्रतीक के रूप में जाना जाता है। इस नक्षत्र के प्रभाव में जन्मे लोगों को जीवन में अनेक सुनहरे अवसर प्राप्त होते हैं और उनमें इन अवसरों का भरपूर लाभ उठाने की प्रबल क्षमता भी होती है। कन्या और तुला चित्रा नक्षत्र से जुड़ी राशियाँ हैं। एक चमकीला आभूषण या रत्न चित्रा नक्षत्र का प्रतीक है। यह प्रतीक सुनहरे अवसरों, प्रचुर धन और जीवन में प्रतिष्ठा का प्रतीक है। ये लोग जीवन के अनुभवों से बहुत सीख लेते हैं। ये लोग जहाँ रहते हैं वहाँ के अन्य लोग इनका विशेष आदर एवं सम्मान करते हैं।

चित्र वास्तु के नियम

चित्रा जन्मनक्षत्र फल को समझने के लिए यह जानना आवश्यक है कि चित्रा नक्षत्र के देवता त्वष्टा हैं। वे एक प्रसिद्ध खगोलीय वास्तुकार और इंजीनियर हैं जो अपनी शक्तियों और अपार प्रतिभा से दुनिया को आकार देते हैं। इसलिए त्वष्टा को विश्वकर्मा भी समझा जाने लगा है। त्वष्टा के स्वामित्व में होने से चित्रा नक्षत्र जातक को ललित कला जैसी विधाओं से युक्त बनाता है। त्वष्टा देवता के आशीर्वाद से जातक प्रतिभाशाली होकर जीवन में ललित कलाओं से संबंधित क्षेत्रों में समृद्धि और सफलता पाता है। विंशोत्तरी के अनुसार देखें तो चित्रा नक्षत्र मंगल के स्वामित्व में आता है। इसलिए ये लोग बहुत ऊर्जावान और परिश्रमी होते हैं थोडे क्रोधी भी होते हैं।

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कुछ सकारात्मक लक्षण

* चित्रा के प्रभाव वाले लोग नेतृत्व और शासन करने की क्षमता रखते हैं क्योंकि वे अनुसन्धाता और प्रगतिशील होते हैं।

* इस नक्षत्र के लोग स्वास्थ्य और उससे संबंधित क्षेत्रों में बहुत आशावादी होते हैं।

* ऐसे जातक कलात्मक क्षेत्रों में बहुत प्रतिभाशाली होते हैं। वे बहुमुखी प्रतिभा के धनी होते हैं और बड़ी-बड़ी उपलब्धियाँ हासिल कर सकते हैं।

* त्वष्टा इन लोगों को महान कौशल प्रदान करता है। विशेष रूप से शिल्प कौशल और मूर्तिकला के गुणों का आशीर्वाद देता है।

* ये लोग व्यापार करना चाहते हैं और आराम पसंद होते हैं।

* आस्तिक होते हैं (पर श्रद्धा डोलती भी रहती है पूरी तरह दृढ श्रद्धावान् नहीं बन पाते)।

प्रमुख नकारात्मक पहलू

* इस नक्षत्र के प्रभाव में जन्मे लोगों के वैवाहिक जीवन में घोर प्रतिकूलताएँ होती हैं।

* विशेषकर चित्रा नक्षत्र के तृतीय और चतुर्थ चरण में जन्मे लोगों का वैवाहिक जीवन दुस्साध्य विषमताओं से भरा होता है।

* यदि कुण्डली में और भी कुछ दोष हों तो कदाचित् इनका विवाह न हो ऐसा भी हो सकता है।

* चित्रा के प्रथम एवं द्वितीय चरण में जन्मे लोगों में स्त्रियोचित गुण एवं स्वभाव होते हैं।

* चित्रा राशिचक्र का मध्य नक्षत्र होने के कारण ये लोग आत्मकेंद्रित और नीरस हो जाते हैं। ये लोग जल्दी चिड़चिड़े और ऊबाऊ हो जाते हैं। जिसके कारण कभी-कभी उनकी खुशियाँ भी बाधित होती हैं।

* इसके प्रभाव में आने वाले लोग बिना सोचे-समझे या बहकावे में आकर गलत निर्णय लेने में जल्दी करते हैं।

* ये लोग अटपटे और आलसी होते हैं।

यदि आप इस नक्षत्र के प्रभाव में जन्मे हैं, तो सुनिश्चित करें कि आप इसके सभी लक्षणों से अवगत हैं।

यदि आप इसकी किसी विषमता से परेशान हैं तो ज्योतिषीय परामर्श के लिए हमसे संपर्क कर सकते हैं। चित्रा नक्षत्र और त्वष्टा देवता के लिए अनुष्ठान बुकिंग कर सकते हैं। यह अनुष्ठान सुनिश्चित करेगा कि आपको इस नक्षत्र से सर्वोत्तम लाभ प्राप्त हों तथा हानिकारक प्रभाव कम से कम हो जाएँ जितने न्यूनतम स्तर तक वो जा सकते हैं। अनुष्ठान से इस नक्षत्र के बुरे प्रभावों में कमी आ जाएगी और सकारात्मक प्रभाव प्रबल होंगे।

डॉ. ब्रजेश पाठक ज्यौतिषाचार्य – Gold Medalist

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