गणेश पूजा और दीपदान – किराए पर घर देने का ज्योतिष उपाय

किराएदार प्राप्ति के लिए गणेश दीपदान (शोध-आधारित विधि)

किराएदार प्राप्ति के लिए गणेश दीपदान

कई लोग अपना घर किराए पर देना चाहते हैं, लेकिन उचित किराएदार नहीं मिल पाते।
यदि पहले आसानी से किराएदार मिल जाते थे और अब स्थिति विपरीत हो गई है, तो किराएदार प्राप्ति के लिए गणेश दीपदान एक सरल और प्रभावी उपाय माना गया है। यह उपाय सायंकाल सूर्यास्त के बाद तथा रात्रि 8 बजे से पहले किया जाता है।


गणेश दीपदान क्यों करें ?

यह उपाय मनोरथ-सिद्धि, बाधा-निवारण और किराएदार प्राप्ति में विशेष प्रभावी माना गया है।
शास्त्रीय पद्धति से किया गया दीपदान गृह-स्थिरता और शुभ फल देता है।


उपाय में आवश्यक देवता

देवता – गणेश भगवान्

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उचित समय (मास और तिथि)

प्रारम्भ मास

वैशाख, श्रावण, कार्तिक, मार्गशीर्ष और माघ मास की पूर्णिमा अत्यंत फलदायी है।

प्रारम्भ तिथि

पंचमी, दशमी, पूर्णिमा – “पूर्णा तिथियाँ” सबसे शुभ

आवश्यकता हो तो किसी भी तिथि से शुरुआत कर सकते हैं

नोट – पूर्णिमा तिथि सर्वोत्तम


गणेश दीपदान विधि – किराएदार प्राप्ति के लिए शुभ उपाय

दीपदान कहाँ करें ?

जिस घर को किराए पर लगाना हो, उसके पूजन-कक्ष, आंगन या छत पर या गणेश भगवान के मंदिर में भी दीपदान किया जा सकता है।

समक्ष : गणेश भगवान का चित्र के सामने दीपदान करना चाहिए। पास में तुलसी का पौधा हो तो अति उत्तम है।


दीपदान का संकल्प

ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः ॐ अद्य ब्रह्मणोऽह्नि द्वितीयपरार्धे श्रीश्वेतवाराहकल्पे वैवस्वतमन्वन्तरे अष्टाविंशतितमे कलियुगे कलिप्रथम चरणे जम्बूद्वीपे भरतखण्डे भारतवर्षे पुण्यस्थाने (वृन्दावन) क्षेत्रे बौद्धावतारे वीर विक्रमादित्यनृपते द्वावशीत्योत्तर-द्विसहस्र-तमेऽब्दे (2082) (सिद्धार्थी) नाम संवत्सरे, (दक्षिणा/उत्तरा) यणे, (हेमंत) ऋतौ, महामंगल्यप्रदे मासानां मासोत्तमे (पौष) मासे, (कृष्ण) पक्षे, (तृतीया) तिथौ, (रवि) वासरे (कश्यप) गोत्रोत्पन्नोऽहं (प्रणवश्रीवास्तव) नामधेयोहं सकलपापक्षयपूर्वकं सर्वारिष्ट शान्तिनिमित्तं सर्वमंगलकामनया श्रुतिस्मृतिशास्त्रोक्तफलप्राप्त्यर्थं विशिष्य 'भाटकगृहीप्राप्तिः' इति मनेप्सितकार्यसिद्धयर्थं पञ्चोपचारपूजन पूर्वकं (एकचत्वारिंशत्)दिनपर्यन्तं सप्तदशसंख्यात्मकं गणपति दीपदानं करिष्ये ।

दीपदान से पूर्व तैयारी

दीपदान से पहले भगवान का पंचोपचार पूजन अवश्य करें।

  • चन्दन
    श्रीखंड चंदनं दिव्यं गंधाढ्यं सुमनोहरम्।
    विलेपनं सुरश्रेष्ठः चंदनं प्रतिगृह्यताम्।।
  • पुष्प
    माल्यादीनि सुगंन्धिनि मालत्यादीनि भक्तितः।
    मयाऽऽहृतानि पुष्पाणि पूजार्थम् प्रतिगृह्यताम्।।
  • धूप
    वनस्पति रसोद्भूतो गन्धाढ्यः सुमनोहरः।
    आघ्रेयः सर्वदेवानां धूपोऽयं प्रतिगृह्यताम्॥
  • दीप
    साज्यं च वर्तिसंयुक्तं वह्निना योजितं मया।
    दीपं गृहाण देवेश त्रैलोक्यतिमिरापहम्।।
  • नैवेद्य
    शर्करा-खण्ड-खाद्यानि दधिक्षीरघृतानि च।
    आहारम्‌ भक्ष्य-भोज्यम्‌ च नैवेद्यम्‌ प्रति-गृह्यताम्‌।।

दीपदान के बाद क्या करें ?

दीपदान के बाद दाहिने हाथ में जल लेकर दीपक के चारों ओर गिराते हुए एक घेरा बनाएँ इसके बाद पुनःजल दाहिने हाथ में थोडा सा जल लेकर यह श्लोक पढ़ें और श्लोक पढने के बाद गणेश भगवान के दाहिने हाथ के पास यह जल गिराते हुए दीपदान समर्पित करें –

अनेन कृतेन दीपदानेन भगवान् गणेशदेवता प्रीयताम् न मम ।


ज्योतिष शास्त्र जीवन का मार्गदर्शक –https://youtu.be/pcVoHLuXlrU?si=7hdMsVBbG2vTAjQN

दीपक संख्या और प्रकार

दीपक संख्या – 17 दीपक

उत्तम पक्ष : 17 अलग-अलग दीपक में एक-एक बाती के साथ दीप प्रज्वलित करके दीपदान करें।

वैकल्पिक पक्ष : एक बड़े दीपक में 17 बातियों को मिलाकर एक बड़ी बाती बनाएँ और दीप प्रज्वलित करके दीपदान करें।

दीपक का द्रव्य
  • शुद्ध गौ-घृत
  • तिल का तेल
  • नारियल का तेल
बाती
  • घी के दीपक हेतु शुद्ध रुई की बाती
  • तेल के लिए लाल सिरों वाली बाती या लाल सूती कपड़े की बाती
दीपक का मुख (दिशा)

पूर्व या उत्तर दिशा

दीपक का स्थान

दीपक को सीधे जमीन पर न रखें, किसी पात्र, थाली या अक्षत (चावल) पर रखें।


दीपदान का मंत्र

ओम् विघ्नराजाय नमः। भो विघ्नेश्वर अमुं दीपं गृहाण।
भाटकगृहीप्राप्ति कर्मणि विघ्ननिवारको भव।
ओम् गं गणपतये नमः।


दीपदान कितने दिन करें ?

समस्या की गंभीरता के अनुसार :

  • 7 दिन
  • 11 दिन
  • 21 दिन
  • 31 दिन
  • 41 दिन (सबसे प्रभावी)

महत्वपूर्ण नोट – यदि आप किसी समस्या से परेशान हैं तो उसके निवारण हेतु भी दीपदान की विधि बताई जा सकती है। आप कमेन्ट करके या हमसे सम्पर्क करके पूछ सकते हैं।


✍ © डॉ. ब्रजेश पाठक ज्योतिषाचार्य

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