नवरात्र विशेष – कलशस्थापना एवं सभी पूजन मुहूर्त तथा वाहन फल विचार

🌼 कलश स्थापना का मुहूर्त 🌼
11 अक्टूबर 2026 से 20 अक्टूबर 2026 तक शारदीय नवरात्र होगा। 11 अक्टूबर को कलश स्थापना करनी है। इस वर्ष कुछ संयोग ऐसे हैं कि कई व्यवधान उपस्थित हैं। विशेष रूप से कलशस्थापना में चित्रा एवं वैधृति का निषेध है जबकि ये दोनों ही उपस्थित हैं।
10 अक्टूबर 2026 रात्रि 09:19 pm से ही प्रतिपदा उपलब्ध है। इसलिए 11 अक्टूबर कलश स्थापना के लिए तिथि संबंधी कोई समस्या नहीं है।
शुक्ल प्रतिपदा को भद्रा करण हो ही नहीं सकता अतः करण संबंधी कोई बाधा नहीं है।
लेकिन…
11 अक्टूबर 2026 को चित्रा नक्षत्र है। अतः कलश स्थापना के लिए नक्षत्रजन्य बाधा है।
11 अक्टूबर 2026 को वैधृति योग है। तो योगजन्य बाधा भी उपस्थित है।
देवीपुराण में कहा गया है कि –
> त्वाष्ट्रवैधृतिंयुक्ता चेत्प्रतिपच्चण्ड़िकार्चने।
> तयोरन्ते विधातव्यं कलशारोपणं_गृहे ।।
अर्थात् – चण्ड़िका के पूजन में चित्रा और वैधृति से युक्त प्रतिपदा हो तो उसके समाप्ति पर कलशस्थापन करे।
लेकिन चित्रा की समाप्ति रात 10:32pm पर और वैधृति की समाप्ति 09:05pm पर हो रही है। ऐसे में कलश स्थापना कब करें यह यक्षप्रश्न की तरह यह घोर समस्या उपस्थित होती है।
इस संबंध में कई बाध नियम प्राप्त होते हैं, जैसे-
दुर्गोत्सव नामक ग्रन्थ में कहा गया है कि यदि चित्रा वैधृति से युक्त होकर द्वितीया तिथि युक्त प्रतिपदा हो तो उस प्रतिपदा का ग्रहण करना चाहिए। 11 अक्टूबर 2026 को द्वितीया तिथि युक्त प्रतिपदा प्राप्त होती है। इसलिए तिथि के अनुसार 11 अक्टूबर 2026 को ही कलश स्थापन करना होगा। 10 अक्टूबर को नहीं कर सकते।
चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग के परिहार के लिए कात्यायन ऋषि कहते हैं –
> प्रतिपद्याश्विने_मासि_भवेद्वैधृतिचित्रयोः।
> आद्यपादौ_परित्यज्य_प्रारम्भेन्नवरात्रकम्।।
अर्थात्- यदि आश्विन प्रतिपदा को वैधृति और चित्रा नक्षत्र प्राप्त हो तो उनके दोपाद का त्याग कर नवरात्र पूजन प्रारम्भ करना चाहिए।
11 अक्टूबर को सुबह 10:03am तक चित्रा का द्वितीय चरण समाप्त हो चुका होगा। अतः सुबह 10:03am के बाद कलश स्थापन करने में कोई दिक्कत नहीं है।
भविष्य पुराण में भी लगभग यही बात कही गई है कि यदि आश्विन प्रतिपदा को चित्रा और वैधृति योग हों तो शुरु के तीन अंशों का त्यागकर पुजन करना चाहिए।
फिर भी यदि किसी को शंका हो तो वे रुद्रयामल तंत्र के मत को स्वीकार करते हुए अभिजीत मुहूर्त में कलश स्थापना करें।
वृन्दावन में अभिजित् मुहूर्त 11 अक्टूबर 2026 को दिन में 11:43am से 12:29pm तक है।
इस प्रकार कलश स्थापना 10:03am के बाद कभी भी या अभिजित् मुहूर्त के समय में सुविधानुसार कर सकते हैं।
नवरात्र प्रदीप नामक ग्रन्थ में अपराह्न में ही कलश स्थापना का निर्देश दिया है कई सारे प्रमाण भी दिया है। 🌿 कहा गया है –
> अश्वयुक्प्रतिपद्येव शुक्लायामपराह्नके।
> कलशस्थापनं कुर्यात् हित्वाचित्रां च वैधृतिम्।।
श्रद्धावान् लोग अपराह्न में या अभिजित् मुहूर्त में कलश स्थापना कर सकते हैं।
🌼 नवरात्र संबंधी सभी मुहूर्त 🌼
नवरात्रि पूजन मुहूर्त….
कलशस्थापना – 11 अक्टूबर 2026; आश्विन शुल्क प्रतिपदा दिन रविवार। प्रतिपदा रात 09:30pm तक है। कलश स्थापना हेतु शुभ मुहूर्त –
- 10:03am के बाद कभी भी या अभिजित् मुहूर्त के समय
बेलवरण – 16 अक्टूबर 2026; आश्विन शुल्क षष्ठी दिन शुक्रवार।
नवपत्रिका पूजन – 17 अक्टूबर 2026; आश्विन शुक्ल सप्तमी, दिन शनिवार।
महास्नान – 18 अक्टूबर 2026; आश्विन शुक्ल अष्टमी, दिन रविवार।
सन्धि बलि– 19 अक्टूबर 2026; आश्विन शुक्ल अष्टमी+नवमी, दिन सोमवार। बलि दिन में 10 बजकर 52 मिनट AM पर।
महानवमी– 19 अक्टूबर 2026; आश्विन शुक्ल अष्टमी+नवमी, दिन सोमवार।
विजयादशमी– 20 अक्टूबर 2026; आश्विन शुक्ल नवमी+दशमी, दिन मंगलवार ।
(नोट – सभी जानकारियाँ दृक्सिद्ध पंचांग और वृन्दावन के अक्षांश-रेखांश पर आधारित हैं।)
🌼 नवरात्र में देवी के वाहन का विचार🌼
देवी के वाहन का विचार
🌿 11 अक्टूबर को रविवार है, रविवार से नवरात्र का आरम्भ हो रहा है। कहा गया है –
शशिसूर्ये गजारूढा अतः भगवती का आगमन हाथी पर हो रहा है।
इसके फल के संबंध में कहा गया है गजे च जलदा देवी अर्थात् हाथी में जब भगवती का आगमन होता है तो भगवती जल (वर्षा) देने वाली होती हैं।
★ 20 अक्टूबर को मंगलवार है, विजयादशमी के दिन मंगलवार है। यदि विजयादशमी के दिन शनिवार या मंगलवार हो तो भगवती का गमन चरणायुध पर होता है। यदि माता रानी का गमन चरणायुध पर हो तो विश्व में विकलता फैल जाती है। सबलोग कष्ट का अनुभव करते हैं। कई तरह की त्रासदियाँ विभिन्न क्षेत्रों में धावा बोलती हैं।
🌿 श्रद्धापूर्वक सभी दुर्गासप्तशती का पाठ करें तथा अतिवृष्टि से और वैश्विक विकलता से भारतवर्ष के सनातनी जनता की रक्षा के लिए माँ भगवती से प्रार्थना करें।
डॉ. ब्रजेश पाठक ज्यौतिषाचार्य


